मुगल सम्राट औरंगजेब आलमगीर भारतीय इतिहास के सबसे विवादास्पद शासकों में से एक रहे हैं। इतिहासकार ऑड्रे ट्रश्के की पुस्तक (औरंगज़ेब: सच्चाई और गल्प) इसी विवाद की परतों को हटाने और औरंगजेब को एक नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है जो इतिहास को केवल "काले और सफेद" के बजाय उसकी जटिलताओं के साथ समझना चाहते हैं।
पुस्तक के अनुसार, औरंगज़ेब ने राजनीतिक विद्रोहों को कुचलने के लिए कुछ मंदिरों को नष्ट किया, लेकिन उन्होंने कई अन्य मंदिरों को दान और संरक्षण भी दिया.
हालांकि, इतिहासकारों का मानना है कि औरंगजेब की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका मानना है कि औरंगजेब एक जटिल व्यक्ति थे जिनके कार्यों और नीतियों में कई पहलू थे। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के साथ न्याय किया और उनके शासनकाल में कई हिंदू विद्वानों और कलाकारों को संरक्षण मिला।
भारतीय इतिहास में मुगल शासक औरंगजेब (Aurangzeb) सबसे विवादित और चर्चित व्यक्तित्वों में से एक हैं। एक तरफ जहाँ कुछ इतिहासकार उन्हें एक कट्टर मुस्लिम शासक बताकर मंदिर तोड़ने वाला बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग उन्हें एक अनुशासित और बड़े प्रशासक के रूप में देखते हैं। इन दोनों ध्रुवों के बीच सच्चाई क्या है?